पांच वर्षों में बदला उत्तराखंड का विकास परिदृश्य: निर्णय, सुशासन और जनविश्वास की नई कहानी

देवेंद्र पाल सिंह

देहरादून। 4 जुलाई 2021 को जब पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब राज्य कोविड-19 महामारी के प्रभाव, आर्थिक चुनौतियों, युवाओं में बढ़ती रोजगार की अपेक्षाओं और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन जैसी समस्याओं का सामना कर रहा था। ऐसे समय में युवा नेतृत्व के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की बागडोर संभाली और विकास, सुशासन तथा जनहित को केंद्र में रखकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बीते चार वर्षों में उत्तराखंड ने नीति निर्माण, आधारभूत संरचना, निवेश, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण तथा प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं।

धामी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का लागू होना माना जाता है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने इस दिशा में कानून लागू किया। यह निर्णय केवल राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में व्यापक चर्चा का विषय बना। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।

युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में पेपर लीक की घटनाओं के बीच उत्तराखंड का यह कानून एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आया। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ है।

महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने उत्तराखंड की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया। यह निर्णय लंबे समय से की जा रही मांग को पूरा करने वाला कदम माना गया। इसके साथ ही महिला सुरक्षा, स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूहों को भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दिया गया।

धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए डिजिटल पंजीकरण, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाओं, हेलीकॉप्टर सेवाओं और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत किया गया। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास कार्यों को भी गति मिली। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि राज्य में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और पर्यटन से जुड़े लाखों लोगों को लाभ मिला।

विकास की गति को नई दिशा देने के लिए सरकार ने निवेश को विशेष प्राथमिकता दी। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से देश-विदेश के निवेशकों को उत्तराखंड में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया। औद्योगिक विकास, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और सेवा क्षेत्र में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि रोजगार के स्थायी अवसर सृजित करना भी रहा है।

सड़क, पुल, स्वास्थ्य और खेल अवसंरचना के विस्तार पर भी लगातार कार्य किया गया। सीमांत क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत करने, आधुनिक अस्पतालों की सुविधाएं बढ़ाने और खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अनेक परियोजनाएं शुरू की गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, विद्युत और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं का विस्तार किया गया। प्राकृतिक खेती, फल उत्पादन, कृषि अवसंरचना तथा ग्रामीण विकास परियोजनाओं के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए गए। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल हुई है।

उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में प्रभावी आपदा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान के सफल संचालन ने राज्य की प्रशासनिक क्षमता और समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अभियान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। सरकार ने इसके बाद आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया गया। विभिन्न सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने तथा ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य आम नागरिक को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना रहा है।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और धार्मिक आस्था को भी नई पहचान दिलाने का प्रयास किया गया। राज्य के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, मेलों और पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया गया। इससे स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को भी नए अवसर प्राप्त हुए।

निश्चित रूप से किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि चुनौतियों से निपटने की क्षमता से भी होता है। रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, शिक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास जैसे विषय अभी भी निरंतर प्रयास की मांग करते हैं। इन मुद्दों पर सरकार कार्य कर रही है, वहीं विपक्ष और स्वतंत्र विशेषज्ञ समय-समय पर अपने सुझाव और आलोचनाएं भी प्रस्तुत करते रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही स्वस्थ परंपरा विकास को और अधिक प्रभावी बनाती है।

चार वर्षों की यात्रा को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने अनेक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिला आरक्षण, निवेश प्रोत्साहन, चारधाम यात्रा का सुदृढ़ प्रबंधन, आधारभूत संरचना का विस्तार और डिजिटल सुशासन जैसे कदम राज्य की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखे जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन नीतियों का वास्तविक प्रभाव रोजगार, आर्थिक विकास, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के आंकड़ों से और अधिक स्पष्ट होगा। उत्तराखंड आज विकास, सांस्कृतिक विरासत और सुशासन के संतुलित मॉडल की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, और यही प्रयास आने वाले समय में राज्य की नई पहचान को और मजबूत कर सकता है।

लेखन भारतीय जनता पार्टी टिहरी लोकसभा के पूर्व सोशल मीडिया प्रमुख है

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