चमोली टनल हादसा: चीख-पुकार के बीच 7 की मौत, 12 घायल; 3 अब भी लापता

150 मीटर अंदर तेज धमाके के साथ आया मलबा-पानी, ऑक्सीजन कम होने से मची अफरातफरी; SDRF-NDRF समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू में जुटीं

चमोली। मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में गुरुवार को हुए हादसे ने मजदूरों के बीच चीख-पुकार मचा दी। टनल के अंदर करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ अचानक भारी भूस्खलन हुआ और देखते ही देखते मलबा, पानी और पत्थर तेज गति से सुरंग में घुस आए। अचानक आए मलबे के तेज धक्के से कई मजदूर दूर जा गिरे, जबकि कुछ मलबे में दब गए। हादसे के बाद मजदूर मदद के लिए चीखते-पुकारते रहे।

दो दिन से गिर रहा था मलबा, फिर भी नहीं संभले हालात

बताया जा रहा है कि हादसे वाली जगह पर पिछले दो दिनों से मलबा गिर रहा था, इसके बावजूद परियोजना प्रबंधन की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। हादसे के बाद टनल में कई जगह मलबा और पानी भर गया। ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होने से अंदर फंसे मजदूरों की मुश्किलें और बढ़ गईं। दम घुटने और मलबे के कारण कई लोग आगे तक नहीं बढ़ पा रहे थे।

22 फंसे थे, 7 की मौत; 12 घायल रेस्क्यू, 3 लापता

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार करीब तीन किलोमीटर लंबी टीआरटी टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी भर गया था। हादसे के समय कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी। इनमें से 12 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि सात मजदूरों की मौत हो गई। तीन मजदूर अब भी लापता हैं।

राहत एवं बचाव कार्य में टनल के भीतर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित बाहर हैं। SDRF की छह टीमें सेनानायक अर्पण यदुवंशी के निर्देशन में मौके पर तैनात हैं।

मलबा, पानी और कम जगह के बीच जिंदगी की तलाश

टनल के भीतर भारी मलबा, पानी, सीमित जगह और ऑक्सीजन की कमी के बीच SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस तथा अन्य विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। रेस्क्यू टीमों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लापता मजदूरों की तलाश की जा रही है।

रेस्क्यू किए गए 12 घायलों में से 11 का इलाज जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में चल रहा है, जबकि रोहित पाण्डे को बेहतर उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर भेजा गया है। प्रशासन के मुताबिक प्रभावितों के आंकड़ों में रेस्क्यू और पहचान की प्रक्रिया के दौरान बदलाव संभव है।

12 घायल मजदूर

सुनील दीवान (20), छत्तीसगढ़; हारबिल गुडिया (27), तपरा; निस्तर भिंगरा (24), झारखंड; विनोद रावना (46), झारखंड; दीना बेगरा (26), झारखंड; खेला राम बिसरा (22), झारखंड; सुबेग सिंह (45), पंजाब; तिलकराज, हिमाचल प्रदेश; चंदन कुमार (39), रोहतास, बिहार; पेन सिंह (33), छत्तीसगढ़; रोहित पाण्डे (20), बिहार और गोविन्दो मंडाल, पश्चिम बंगाल।

सात मजदूरों की मौत

प्रदीप पंवार (31), टिहरी गढ़वाल; मुकेश सिंह, चमोली; दुर्लभ शर्मा, उत्तर प्रदेश; विजय हंसदा, उत्तर प्रदेश; जितेन्द्र कुमार, उत्तर प्रदेश; लोकेश्वर, छत्तीसगढ़ और भुनेश्वर, छत्तीसगढ़।

तीन मजदूर अब भी लापता

लुकास टोपनो, झारखंड; चेतन पोयाम, छत्तीसगढ़ और देवनाथ, छत्तीसगढ़ की तलाश जारी है।

लापता मजदूरों के लिए जारी है सबसे बड़ा ऑपरेशन

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। टनल के भीतर पानी और मलबे की चुनौती के बावजूद बचाव टीमें बेहद सावधानी से आगे बढ़ रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती तीन लापता मजदूरों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।

ADVERTISEMENTS Ad Ad

सम्बंधित खबरें