जहाँ राजनीति चुप रही, वहाँ जनसेवा ने दिखाई राहसंजय पाण्डे की पहल से अल्मोड़ा जन सुविधा केंद्र में खाता-खतौनी सेवा होगी बहाल

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर निगम परिसर स्थित जन सुविधा केंद्र में खाता-खतौनी की ऑनलाइन सेवा एक लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू होने जा रही है। रेवेन्यू बोर्ड ने सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे को मोबाइल पर आधिकारिक सूचना देकर इसकी पुष्टि की है। तकनीकी सुधार पूर्ण होने के बाद यह सेवा जनवरी 2026 से बहाल कर दी जाएगी।

बीते लगभग एक वर्ष से यह सेवा बंद रहने के कारण आम नागरिकों, विशेषकर किसानों, बुजुर्गों और दूरदराज़ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए लोगों को शहर से बाहर भटकना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही थी।

साइबर अटैक बना बाधा
रेवेन्यू बोर्ड के अनुसार, पिछले वर्ष हुए साइबर अटैक के कारण जन सुविधा केंद्र की तकनीकी प्रणाली प्रभावित हुई थी, जिसके चलते खाता-खतौनी की ऑनलाइन सेवा ठप हो गई थी। अब आवश्यक तकनीकी सुधार पूरे कर लिए गए हैं। सेवा बहाल होने के बाद नगर निगम परिसर स्थित जन सुविधा केंद्र में दोपहर 12 बजे तक खाता-खतौनी सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्य किए जाएंगे।

कुमाऊँ कमिश्नर से रेवेन्यू बोर्ड तक पहुँचा मामला
यह जनहित का विषय सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने गंभीरता और निरंतरता के साथ उठाया। पहले उन्होंने मामला कुमाऊँ कमिश्नर के संज्ञान में लाया, जिसके बाद इसे रेवेन्यू बोर्ड तक प्रेषित किया गया। प्रशासनिक स्तर पर लगातार संवाद और दस्तावेज़ी प्रयासों के बाद अब सेवा बहाली का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

बिना शोर-शराबे मिली सफलता
इस पूरे प्रकरण में संजय पाण्डे ने न तो धरना-प्रदर्शन किया और न ही नारेबाज़ी। तथ्यों, दस्तावेज़ों और शांत प्रशासनिक संवाद के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया कि सधे हुए प्रयास भी ठोस परिणाम दे सकते हैं।

राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताते हुए संजय पाण्डे ने कहा,
“जो राजनीतिक पार्टियाँ रोज़ धरने-प्रदर्शन करती हैं, वे ऐसे वास्तविक जनहित के मामलों में पूरी तरह मौन रहीं। जनता की समस्याओं पर राजनीति नहीं, ज़िम्मेदारी दिखनी चाहिए।”

पहले भी कर चुके हैं कई जनहित कार्य
यह पहला मौका नहीं है जब संजय पाण्डे की पहल से कोई बड़ा जनहित कार्य पूरा हुआ हो। इससे पहले भी उनके प्रयासों से कई ऐसे काम संपन्न हुए हैं, जो वर्षों तक केवल फाइलों में अटके रहे। उनकी कार्यशैली परिणाम-केंद्रित और पूरी तरह जनहित पर आधारित रही है।

अल्मोड़ा की जनता के लिए खाता-खतौनी सेवा की बहाली एक बड़ी राहत है। यह निर्णय एक स्पष्ट संदेश देता है कि सच्ची जनसेवा शोर से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों से पहचानी जाती है।

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