
उत्तराखंड की जेलों में शिक्षा की नई शुरुआत: सितारगंज केंद्रीय कारागार में खुला विशेष अध्ययन केंद्र, अब कैदी भी करेंगे उच्च शिक्षा
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहल, बंदियों को मिलेगा निःशुल्क प्रवेश और अध्ययन सामग्री; पुस्तकालय को 280 पुस्तकें भी भेंट
हल्द्वानी/सितारगंज। उत्तराखंड में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने केंद्रीय कारागार सितारगंज में विशेष अध्ययन केंद्र की स्थापना की है। विश्वविद्यालय और कारागार प्रशासन के बीच हुए अनुबंध के बाद अब जेल में निरुद्ध कैदी विभिन्न उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में निःशुल्क प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर कारागार पुस्तकालय को विभिन्न विषयों की लगभग 280 पुस्तकें भी भेंट कीं।
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर, वंचित एवं उपेक्षित वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुंचाना है। इसी सोच के तहत अब जेल में बंद कैदियों को भी शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगी।

निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं प्रो. गिरिजा पाण्डे ने कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। विश्वविद्यालय लगातार नए अध्ययन केंद्र स्थापित कर उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बना रहा है।
उपनिदेशक प्रो. एम.एम. जोशी ने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, कोई भी व्यक्ति उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट ने भी विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय कारागार सितारगंज के वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और बंदियों तक उच्च शिक्षा पहुंचाना उनके पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रम का संचालन सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट ने किया। उन्होंने बताया कि विशेष अध्ययन केंद्र के माध्यम से इच्छुक कैदियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय ने कारागार पुस्तकालय को लगभग 280 पुस्तकों का संग्रह भी भेंट किया है, जिससे बंदियों को अध्ययन में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कारागार प्रशासन तथा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक बंदियों की उपस्थिति रही। इस पहल को शिक्षा की सर्वसुलभता, समान अवसर और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।








