सरकारी स्कूल की बेटी ने रचा इतिहास: अनुष्का राणा बनी उत्तराखंड टॉपर, जेईई मेंस में भी मारी बाजी

देहरादून की धरती पर शिक्षा का नया सूरज चमका है—अनुष्का राणा, जिन्होंने उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 98.6% अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। यही नहीं, उन्होंने जेईई मेंस में 98.8 परसेंटाइल हासिल कर एक और उपलब्धि अपने नाम की। अनुष्का ने यह साबित कर दिखाया कि सरकारी विद्यालय से पढ़कर भी बुलंदियों को छुआ जा सकता है।

बड़ासी इंटर कॉलेज, देहरादून की छात्रा अनुष्का मूल रूप से टिहरी गढ़वाल जिले के भल्डियाना गांव की रहने वाली हैं और वर्तमान में अपने परिवार के साथ देहरादून के बंजारावाला क्षेत्र में रहती हैं। अनुष्का के पिता रामेंद्र राणा, उसी स्कूल में भौतिकी के प्रवक्ता हैं, जबकि मां कुमुद राणा एक गृहिणी हैं।

शिक्षा मंत्री का फोन बना ऐतिहासिक पल

अनुष्का ने बताया कि परिणाम के दिन इंटरनेट की दिक्कतों के कारण वह अपना रिजल्ट नहीं देख पा रही थीं। लेकिन जब शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने खुद फोन कर उन्हें टॉप करने की खबर दी, तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

डॉक्टर बन देश सेवा का सपना

अनुष्का का सपना है कि वह डॉक्टर बनकर देश सेवा करें। उन्होंने बोर्ड की तैयारी के साथ-साथ जेईई मेंस की पढ़ाई भी पूरी गंभीरता से की और दोनों ही मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन किया।

सरकारी स्कूलों के लिए बना प्रेरणा स्रोत

अनुष्का ने कहा कि सरकारी विद्यालयों का शैक्षिक माहौल कहीं से भी निजी विद्यालयों से कम नहीं है। बस छात्रों को लगन और आत्मविश्वास से पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई एक निजी स्कूल से की थी, लेकिन 11वीं-12वीं के लिए अपने पिता के सरकारी स्कूल को चुना और वहां से सफलता की ऊंचाइयों को छू लिया।

मां का संदेश – सरकारी स्कूलों को कमजोर न समझें

अनुष्का की मां कुमुद राणा ने कहा, “सरकारी स्कूलों को लेकर समाज में जो भ्रांतियां हैं, उन्हें मेरी बेटी ने तोड़ दिया है। मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी मंच से सफलता पाई जा सकती है।”

परिवार में शिक्षा का मजबूत माहौल

अनुष्का के बड़े भाई इस समय आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे माहौल ने अनुष्का को भी हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।


ये सफलता सिर्फ एक छात्रा की नहीं, एक विचार की जीत है — कि मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन से सरकारी स्कूलों से भी सितारे पैदा होते हैं।

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