अब पति के नाम से नहीं होगा महिला वोटरों का वैरिफिकेशन, चुनाव आयोग ने बदला नियम

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) शुरू करने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वर्ष 2003 के बाद पहली बार मतदाता सूची में शामिल हुई महिलाओं का सत्यापन अब उनके माता-पिता, विशेषकर पिता के नाम के आधार पर किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

राज्यभर में 29 मई से एसआईआर अभियान के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू होगा, जबकि 8 जून से बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दोहरे पंजीकरण को रोका जा सके।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिनके नाम विवाह के बाद नए पते पर जोड़े गए या फिर विभिन्न कारणों से रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाए। ऐसे मामलों में सत्यापन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अब आयोग ने निर्णय लिया है कि वर्ष 2003 के बाद मतदाता बनी महिलाओं के रिकॉर्ड का सत्यापन उनके मूल पारिवारिक विवरण के आधार पर किया जाएगा।

सत्यापन के दौरान महिला के नाम, जन्म संबंधी विवरण और पिता के नाम का मिलान प्राथमिक आधार माना जाएगा। इससे एक ही व्यक्ति का अलग-अलग स्थानों पर नाम दर्ज होने जैसी संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने यह भी साफ किया है कि इस प्रक्रिया का महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों या वर्तमान निवास से कोई संबंध नहीं है। विवाह के बाद पता बदलने वाली महिलाओं के वर्तमान पते और संबंधित दस्तावेजों का भी नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा।
आयोग ने सभी बीएलओ को निर्देश दिए हैं कि सत्यापन अभियान के दौरान आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर इस अभियान में सहयोग करें, ताकि राज्य की मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और विश्वसनीय बनाया जा सके।

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