
एमआरपी की ‘मनमानी’ पर देशव्यापी बिगुल, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने छेड़ा जनजागरण अभियान
हरीशंकर सिंह सैनी
नई दिल्ली। देशभर में रोजमर्रा की वस्तुओं पर लिखे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को लेकर लंबे समय से उपभोक्ताओं के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कभी एक ही उत्पाद अलग-अलग दुकानों पर अलग कीमत पर बिकता दिखाई देता है तो कभी ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में भारी मूल्य अंतर उपभोक्ताओं को उलझन में डाल देता है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा जनजागरण अभियान शुरू किया है। संगठन का कहना है कि देश में MRP निर्धारण के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण हो रहा है। ग्राहक पंचायत लंबे समय से मांग कर रही है कि MRP तय करने के लिए केंद्र सरकार एक स्वतंत्र बोर्ड या आयोग का गठन करे तथा इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
ग्राहक पंचायत का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में कंपनियां अपनी सुविधानुसार अधिकतम खुदरा मूल्य तय कर देती हैं, जबकि उत्पादन लागत और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है। संगठन ने इस विषय को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनाने के लिए देशव्यापी कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ की है।

देशभर में चलेगा जनजागरण अभियान
ग्राहक पंचायत द्वारा घोषित कार्यक्रमों के अनुसार अब भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों में MRP व्यवस्था के विरोध में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। संगठन का उद्देश्य आम नागरिकों को यह समझाना है कि अधिकतम खुदरा मूल्य की वर्तमान प्रणाली किस प्रकार उपभोक्ता हितों के विरुद्ध कार्य कर रही है।
अभियान के अंतर्गत सबसे पहले देश के सभी जिलों में जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन पत्र दिए जाएंगे। इन ज्ञापन पत्रों में MRP निर्धारण के लिए पारदर्शी नीति लागू करने तथा एक नियामक तंत्र बनाने की मांग की जाएगी।
इसके साथ ही प्रमुख शहरों और स्थानों पर प्रबुद्ध जन गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इन गोष्ठियों में अर्थशास्त्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापार विशेषज्ञों, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों को शामिल कर विषय पर व्यापक चर्चा की जाएगी। ग्राहक पंचायत का मानना है कि जब तक समाज के सभी वर्ग इस विषय को गंभीरता से नहीं समझेंगे, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलना कठिन होगा।

हस्ताक्षर अभियान से जोड़े जाएंगे आम लोग
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हस्ताक्षर अभियान भी होगा। इसके माध्यम से आम नागरिकों को सीधे इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा। पंचायत का कहना है कि यह केवल किसी संगठन का आंदोलन नहीं बल्कि हर उपभोक्ता के अधिकारों से जुड़ा विषय है। गांवों, कस्बों और शहरों में चलने वाले इस हस्ताक्षर अभियान के जरिए लाखों लोगों का समर्थन जुटाने की तैयारी की जा रही है।
संगठन के कार्यकर्ता बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक कार्यक्रमों में जाकर लोगों को MRP व्यवस्था की खामियों के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद उनसे हस्ताक्षर कर समर्थन देने की अपील की जाएगी।

सांसदों से भी मांगा जाएगा समर्थन
ग्राहक पंचायत ने निर्णय लिया है कि अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों से मिलकर उन्हें भी इस विषय से अवगत कराया जाएगा। संगठन के प्रतिनिधि सांसदों को ज्ञापन सौंपेंगे और संसद में इस मुद्दे को उठाने का आग्रह करेंगे। पंचायत का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि इस विषय को संसद में प्रभावी ढंग से उठाते हैं तो सरकार पर नीति निर्माण का दबाव बढ़ेगा।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री, उपभोक्ता मामलों के मंत्री, उद्योग मंत्री और वित्त मंत्री को भी डाक के माध्यम से आवेदन पत्र भेजे जाएंगे। इन पत्रों में उपभोक्ताओं के हित में ठोस नीति लागू करने की मांग की जाएगी।
12 जून को जंतर-मंतर पर धरना
राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस अभियान का बड़ा चरण 12 जून को देखने को मिलेगा, जब दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर विशाल धरना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ग्राहक पंचायत का दावा है कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और उपभोक्ता इस धरने में शामिल होंगे।
संगठन का कहना है कि यह धरना केवल विरोध प्रदर्शन नहीं होगा बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की आवाज को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाने का प्रयास होगा। धरने के दौरान सरकार से मांग की जाएगी कि MRP निर्धारण के लिए स्वतंत्र नियामक संस्था बनाई जाए और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी की जाए।
केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात
इस अभियान को गति देने के लिए 25 और 26 मई को दिल्ली में ग्राहक पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के चार वरिष्ठ मंत्रियों से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रियों को MRP व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया तथा ज्ञापन सौंपकर समर्थन की अपेक्षा की।
जिन मंत्रियों से मुलाकात की गई उनमें निर्मला सीतारमण, हर्ष मल्होत्रा, दुर्गादास उइके तथा सावित्री ठाकुर शामिल हैं।
ग्राहक पंचायत के अनुसार सभी मंत्रियों ने विषय को गंभीरता से सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगठन का दावा है कि सरकार के स्तर पर भी अब इस मुद्दे को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
‘उपभोक्ता को न्याय दिलाने का अभियान’
नारायण भाई शाह ने कहा कि MRP का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को अधिक कीमत वसूले जाने से बचाना था, लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कई स्थानों पर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी उत्पाद की वास्तविक कीमत बहुत कम है और उस पर अत्यधिक MRP लिख दी जाती है तो उपभोक्ता भ्रमित होता है और कई बार जरूरत से ज्यादा कीमत चुकाने को मजबूर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि ग्राहक पंचायत का यह आंदोलन किसी कंपनी या व्यापार वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग के लिए है। उनका कहना है कि सरकार को ऐसा तंत्र विकसित करना चाहिए जिसमें उत्पादन लागत, कर व्यवस्था, परिवहन खर्च और उचित लाभ को ध्यान में रखते हुए MRP तय हो।
बढ़ सकती है राष्ट्रीय बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान व्यापक जनसमर्थन जुटाने में सफल रहता है तो आने वाले समय में MRP व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस छिड़ सकती है। डिजिटल बाजार और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव के बीच मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता आज पहले से अधिक महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है।
उधर, ग्राहक पंचायत ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने इस विषय पर ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए देशव्यापी जागरूकता और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।









