
अल्मोड़ा के इस स्कूल में शौचालयों की कमी, भाजपा नेता ने उठाया छात्रों की परेशानी का मुद्दा, शौचालय निर्माण की कवायद शुरू
दूनाथल राजकीय इंटर कॉलेज में पुराने शौचालय जर्जर, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाने का प्रस्ताव तैयार
अल्मोड़ा। जिले के धौलादेवी विकासखंड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज दूनाथल में 200 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त शौचालय नहीं होने का मामला सामने आया है। विद्यालय में पहले से बने शौचालय भी जर्जर हालत में हैं, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर छात्राओं को होने वाली असुविधा को देखते हुए अब विद्यालय में नए शौचालयों के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है।
इस मामले को लेकर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष त्रिलोक राम ने 5 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की थी। उन्होंने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। पुराने शौचालयों की हालत खराब होने से भी विद्यार्थियों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग शौचालयों के निर्माण की मांग उठाई।
शिकायत के बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 17 सितंबर 2026 को ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद विभाग की ओर से विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया गया, जिसमें शौचालयों की कमी और पुराने शौचालयों के जर्जर होने की पुष्टि हुई।
निरीक्षण के बाद विद्यालय में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव में मजबूत नींव, ईंट की दीवारें, आरसीसी छत, दरवाजे और रोशनदान के निर्माण का प्रावधान है। साथ ही शौचालयों की अंदरूनी दीवारों और फर्श पर सिरेमिक टाइल्स लगाने तथा चारों ओर एप्रन बनाने की योजना भी शामिल है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने ग्रामीण निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं कि यदि प्रस्तावित निर्माण कार्य राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के निर्धारित मानकों के अंतर्गत आता है, तो संबंधित अधिकारी से सत्यापन कराकर तीन कार्यदिवस के भीतर निर्माण का लागत अनुमान उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद निर्माण को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब विद्यार्थियों और अभिभावकों को उम्मीद है कि विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यालय में शौचालयों की समस्या का समाधान होगा और छात्र-छात्राओं को स्वच्छ एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।










