
हल्द्वानी रिंग रोड परियोजना को मिली रफ्तार, सर्वे के लिए दिल्ली की कंपनी चयनित
हल्द्वानी। शहर में बढ़ते जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना को अब नई गति मिल गई है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने सर्वे कार्य के लिए दिल्ली की निजी कंपनी एमएस सक्षम सर्वे सॉल्यूशन का चयन कर वर्कऑर्डर जारी कर दिया है। कंपनी को नौ महीने के भीतर वनभूमि का आकलन, सड़क की जद में आने वाले पेड़ों की गणना और परियोजना की लागत संबंधी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके तहत ऑनलाइन आवेदन डीएफओ, वन संरक्षक और राज्य नोडल अधिकारी के माध्यम से केंद्रीय वन मंत्रालय को भेजा जाएगा।
रिंग रोड परियोजना की शुरुआत अप्रैल 2017 में की गई थी, जिसका उद्देश्य हल्द्वानी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना है। करीब 51 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को चार हिस्सों में बांटा गया था। इसमें तीनपानी से काठगोदाम तक का हिस्सा पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा चौड़ा किया जा चुका है, जबकि नरीमन से गुलाबघाटी होते हुए फतेहपुर तक का हिस्सा बाद में योजना से हटा दिया गया।
अगस्त 2024 में शासन स्तर पर हुए निर्णय के बाद रिंग रोड के रूट में बदलाव करते हुए इसे लामाचौड़ से रामपुर रोड तक घुमाने का फैसला लिया गया, जिससे रामपुर रोड और कालाढूंगी मार्ग से आने वाले वाहनों को नया बाईपास मिल सके। पहले इसे ग्रामीण क्षेत्र से निकालने की योजना थी, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते अब सड़क को आबादी से सटे जंगल क्षेत्र से ले जाने का प्रस्ताव तय किया गया है।
इस परियोजना के लिए शासन ने 26.35 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत किया है। टेंडर प्रक्रिया में हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की तीन कंपनियों ने भाग लिया, जिनमें तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद दिल्ली की कंपनी को चयनित किया गया।
प्रस्तावित रिंग रोड भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास जाकर जुड़ेगी। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, इस परियोजना के लिए करीब 56 हेक्टेयर वनभूमि का अधिग्रहण और 4280 पेड़ों के कटान की आवश्यकता हो सकती है, जबकि निर्माण लागत लगभग 172 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि अंतिम आंकड़े विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।
वनभूमि के उपयोग के बदले राज्य सरकार को दोगुनी भूमि पर पौधरोपण करना होगा, जिसे पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत अनिवार्य किया गया है।









