1 अप्रैल से उत्तराखंड में बड़ा बदलाव: LPG महंगा, टोल-यूजर चार्ज बढ़ा, कचरा नियम सख्त, शराब के दाम भी बढ़े

हल्द्वानी। उत्तराखंड में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष के साथ कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता और पर्यटकों पर पड़ेगा। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों से लेकर टोल टैक्स, कचरा प्रबंधन और शराब के दाम तक कई नियमों में बदलाव किया गया है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा
तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं। कीमतों में यह इजाफा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण किया गया है।

लच्छीवाला टोल प्लाजा पर बढ़ी दरें
देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे स्थित लच्छीवाला टोल प्लाजा पर टोल टैक्स में वृद्धि लागू कर दी गई है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, 20 किमी के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों के मासिक पास शुल्क को 340 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया गया है।

नई टोल दरें (रुपये में):
कार/जीप/वैन: 105 → 105 (आना-जाना: 160, मासिक: 3565)
हल्के व्यावसायिक वाहन: 170 → 175 (आना-जाना: 260, मासिक: 5760)
बस/ट्रक (दो एक्सल): 355 → 360 (आना-जाना: 545, मासिक: 12070)
तीन एक्सल वाहन: 385 → 395 (आना-जाना: 595, मासिक: 13170)
भारी वाहन (4-6 एक्सल): 555 → 570 (आना-जाना: 850, मासिक: 18930)
बड़े वाहन (7+ एक्सल): 675 → 690 (आना-जाना: 1035, मासिक: 23045)

पर्यटकों से अब वसूला जाएगा यूजर चार्ज
1 अप्रैल से उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को यूजर चार्ज देना होगा। यह व्यवस्था ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत लागू की गई है।
पर्वतीय क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए विशेष संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे और खुले में कूड़ा फैलाने पर सख्ती की जाएगी।

कचरा छंटाई के नए नियम लागू
अब कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा:
गीला कचरा: रसोई अपशिष्ट, फल-सब्जी के छिलके
सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु
स्वच्छता अपशिष्ट: डायपर, सैनिटरी पैड आदि
हानिकारक कचरा: बल्ब, दवाइयां, पेंट डिब्बे
होटल और रेस्तरां को भी गीले कचरे का निस्तारण तय मानकों के अनुसार करना होगा।

अंग्रेजी शराब के दाम बढ़े
नए वित्तीय वर्ष से अंग्रेजी शराब के दाम 10 से 20 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। हालांकि, देशी शराब की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

1 अप्रैल से लागू इन बदलावों का असर आम लोगों की जेब से लेकर पर्यावरण व्यवस्था तक दिखाई देगा। सरकार का फोकस जहां राजस्व बढ़ाने पर है, वहीं स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

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