सेवा, साधना और संयम ही सनातन धर्म का मूल: बाबा भवानी गिरी जी महाराज

देहरादून। आज के दौर में जब भोग-विलास, दिखावा और तेज़ रफ्तार जीवनशैली ने युवा पीढ़ी को मानसिक रूप से अशांत और दिशाहीन बना दिया है, ऐसे समय में समाज को ऐसे मार्गदर्शकों की आवश्यकता है जो केवल उपदेश नहीं, बल्कि अपने कर्मों से दिशा दिखाएं। देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र में नून नदी के तट पर स्थित संतोषी माता गौशाला और एकादश मुखी हनुमान मंदिर इसी कर्मयोग की जीवंत मिसाल हैं।

इन सेवाओं के केंद्र में हैं बाबा भवानी गिरी जी महाराज, जिन्होंने सनातन धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए उसे करुणा, सेवा और संयम से जोड़कर समाज के सामने प्रस्तुत किया है। सड़कों पर घायल और तड़पती गोमाता से लेकर भटकती युवा पीढ़ी तक, बाबा का प्रयास है कि हर पीड़ा को धर्म के सहारे राहत मिले।

बिना किसी सरकारी सहायता के, सीमित संसाधनों में निरंतर चल रही गौ सेवा, बीमार एवं दुर्घटनाग्रस्त गोवंश का उपचार और युवाओं को सेवा से जोड़ने का कार्य बाबा की साधना का ही रूप है।

वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर सिंह से विशेष बातचीत में बाबा भवानी गिरी जी महाराज ने सनातन धर्म की प्रासंगिकता, युवाओं के भटकाव, गौ सेवा के संघर्ष और साधना के माध्यम से जीवन में संतुलन व शांति के मार्ग पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

“धर्म जीवन को रोकता नहीं, सही दिशा देता है”
बाबा भवानी गिरी जी महाराज का कहना है कि सनातन धर्म त्याग या पलायन नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच संतुलन सिखाता है। भोग-विलास यदि सीमित हो तो वह जीवन का हिस्सा है, लेकिन जब वही लक्ष्य बन जाए तो विनाश तय है। धर्म मन को स्थिर करता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है।

युवा भटकाव पर चिंता
बाबा जी मानते हैं कि आज की युवा पीढ़ी संस्कारों की कमी और सोशल मीडिया के दिखावे के कारण अपने मूल से दूर हो रही है। पैसा, ऐश और नशे को सफलता मान लिया गया है, लेकिन इसके बाद आने वाला खालीपन युवाओं को गलत राह पर ले जाता है।

गौ सेवा: सबसे कठिन लेकिन सबसे पवित्र सेवा
गौ सेवा को बाबा सबसे कठिन सेवा मानते हैं क्योंकि इसमें लाभ नहीं, केवल जिम्मेदारी है। चारा, दवाइयां और इलाज महंगे हैं, फिर भी सेवा बिना रुके जारी है। बाबा युवाओं से अपील करते हैं कि यदि जीवनभर सेवा संभव न हो, तो महीने में एक दिन सेवा जरूर करें।

संतोषी माता और हनुमान साधना से जीवन में संतुलन
मां संतोषी माता की पूजा असंतोष को समाप्त कर जीवन में संतुलन लाती है, वहीं एकादश मुखी हनुमान जी की साधना आत्मबल और संयम प्रदान करती है। बाबा का कहना है कि मंत्र कोई चमत्कार नहीं, बल्कि अनुशासन है।

मंदिर नहीं, संस्कार केंद्र
बाबा भवानी गिरी जी महाराज के अनुसार मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि संस्कार केंद्र हैं, जहां कई युवाओं ने नशा छोड़ा, सेवा अपनाई और परिवार से दोबारा जुड़े।

भविष्य की योजनाएं
गौशाला का विस्तार
युवाओं के लिए सेवा शिविर
संस्कार शिक्षा व साधना केंद्र की स्थापना

युवाओं के लिए संदेश
“भोग को छोड़ो मत, उस पर नियंत्रण रखो।
सेवा, साधना और संयम — यही सनातन जीवन है।”

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