नंदा देवी राजजात 2027 में कराने के निर्णय पर विवाद, कुरुड़ मंदिर में आज महापंचायत

कर्णप्रयाग/चमोली। उत्तराखंड की आस्था और परंपरा का प्रतीक हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात को सितंबर 2026 के बजाय अब वर्ष 2027 में आयोजित किए जाने के निर्णय ने विवाद का रूप ले लिया है। श्रीनंदा देवी राजजात समिति के फैसले के खिलाफ तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने कड़ा ऐतराज जताया है। इसी क्रम में आज कुरुड़ मंदिर में 484 गांवों की महापंचायत आयोजित की जा रही है, जिसमें यात्रा के भविष्य को लेकर चर्चा होगी।

कर्णप्रयाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सितंबर माह के दौरान हिमस्खलन का खतरा, तैयारियों की स्थिति और पारंपरिक 12 वर्षीय चक्र की गणना को ध्यान में रखते हुए राजजात को 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राजजात जैसे विशाल आयोजन के सुचारु संचालन के लिए कुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर अलग निकाय बनाए जाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

समिति के अनुसार, प्रशासन ने यात्रा मार्गों के सुधार के लिए 20 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी है, जिससे भविष्य में श्रद्धालुओं को लगभग 280 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा में सुविधा मिल सके।

वहीं, नंदा धाम कुरुड़ के पुजारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस निर्णय को आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है। कुरुड़ बंड डोली अध्यक्ष अशोक गौड़, सुखवीर रौतेला, नरेश गौड़ और संरक्षक कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि नंदा देवी राजजात जैसे महान धार्मिक अनुष्ठान पर कोई व्यक्ति विशेष फैसला नहीं कर सकता। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीति से प्रेरित है और जनभावनाओं के विपरीत है।

विरोध करने वालों ने स्पष्ट किया कि “मां नंदा ही करेंगी फैसला, व्यक्तियों का निर्णय मान्य नहीं”। इसी विश्वास के तहत आज कुरुड़ मंदिर में होने वाली महापंचायत में मां नंदा को अवतरित किया जाएगा और देवी की इच्छा के अनुसार ही यह तय किया जाएगा कि राजजात 2026 में होगी या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजजात को टालने की कोशिशें परंपरा और जनआस्था के खिलाफ हैं, इसलिए अंतिम निर्णय दिव्य आदेश और जन-सहमति के बाद ही स्वीकार्य होगा। अब सबकी निगाहें कुरुड़ मंदिर में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जहां से नंदा देवी राजजात को लेकर अगला रुख तय हो सकता हैं।

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