धारचूला: जयकोट में जंगल के रास्ते पर तीन भालुओं का हमला, ग्रामीण ने भिड़कर बचाई जान; हेलीकॉप्टर से हल्द्वानी रेफर

धारचूला। चौदास घाटी के जयकोट में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां लंकारी जंगल के बीच स्थित पैदल रास्ते पर तीन भालुओं के झुंड ने एक ग्रामीण पर अचानक हमला कर दिया। हमले में घायल ग्रामीण ने बहादुरी दिखाते हुए भालुओं से भिड़कर अपनी जान बचाई, हालांकि संघर्ष के दौरान वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया।

जानकारी के अनुसार, जयकोट निवासी नरेंद्र सिंह (36) पुत्र धनपति सुबह गांव से बाहर किसी काम से जा रहे थे। गांव से बाहर निकलने का रास्ता लंकारी जंगल से होकर गुजरता है। जैसे ही वह जंगल वाले मार्ग पर पहुंचे, अचानक एक मादा भालू अपने दो बच्चों के साथ उन पर टूट पड़ी। हमले से नरेंद्र सिंह पहले घबरा गए, लेकिन खुद को बचाने के लिए उन्होंने बहादुरी से भालुओं का मुकाबला किया। लगभग कुछ मिनट तक चले संघर्ष के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

हमले के दौरान उनकी चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़े और उन्हें किसी तरह भालुओं से सुरक्षित निकालकर धारचूला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टर्स ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि नरेंद्र सिंह के शरीर पर गहरे घाव हैं और हालत नाजुक है। गंभीर स्थिति को देखते हुए एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने तुरंत घायल को हेलीकॉप्टर से हल्द्वानी रेफर करने की व्यवस्था की।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हमला करने वाली भालू अपने दो शावकों के साथ काली नदी पार कर नेपाल की ओर जाती देखी गई है। लोगों में दहशत इस बात को लेकर भी है कि भालुओं की गतिविधियां बढ़ रही हैं और गांव के आसपास अब लगातार दिख रहे हैं।

इस बीच गुंजी से प्राप्त जानकारी के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्र में गुंजी और नाबी के मध्य पहली बार भालू और गुलदार दोनों के दिखने की पुष्टि हुई है। व्यास घाटी के इस इलाके में इससे पहले न तो भालू और न ही गुलदार दिखाई देते थे। वन्यजीवों के इस नए मूवमेंट ने ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते सूरज ढलने के बाद लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन व वन विभाग से जंगल क्षेत्रों में त्वरित पेट्रोलिंग बढ़ाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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