मनरेगा को कमजोर करना गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा हमला: आलोक शर्मा

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर मनरेगा खत्म करने और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लगाए आरोप

हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री आलोक शर्मा ने केंद्र की मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने और गरीबों से काम का अधिकार छीनने का गंभीर आरोप लगाया है। हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज, श्रम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की सोच का जीवंत उदाहरण है। इसे खत्म करने की कोशिश गांधी जी के विचारों और संविधान दोनों पर हमला है।

श्री आलोक शर्मा ने कहा कि लोकसभा में तथाकथित “सुधारों” के नाम पर लाए गए नए ढांचे के जरिए सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना की मूल आत्मा को खत्म कर दिया है। अब तक संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित रही मनरेगा को एक शर्तों वाली, केंद्र नियंत्रित योजना में बदल दिया गया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों का कानूनी अधिकार समाप्त हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनरेगा के खिलाफ रहे हैं और इसे “कांग्रेस की नाकामी का स्मारक” तक कह चुके हैं। बीते 11 वर्षों में मोदी सरकार ने बजट में कटौती, राज्यों को वैधानिक फंड न देने, जॉब कार्ड हटाने और आधार आधारित भुगतान को अनिवार्य कर करीब सात करोड़ मजदूरों को योजना से बाहर करने का काम किया है। इसके चलते पिछले पांच वर्षों में मनरेगा के तहत रोजगार औसतन 50 से 55 दिन तक ही सिमट कर रह गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवन रेखा साबित हुआ था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने इसे मजबूत करने के बजाय कमजोर किया। उन्होंने इसे सत्ता के नशे में चूर तानाशाही सरकार की बदले की राजनीति करार दिया।

राज्यों पर आर्थिक बोझ डालने का आरोप
श्री शर्मा ने कहा कि मनरेगा अब तक 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना थी, लेकिन मोदी सरकार अब लगभग 40 प्रतिशत खर्च राज्यों पर डालना चाहती है, जिससे राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र नियम, ब्रांडिंग और श्रेय अपने पास रखेगा, जबकि भुगतान की जिम्मेदारी राज्यों पर थोप दी जाएगी। यह संघीय ढांचे के साथ सीधा धोखा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के तहत सरकार को हर साल तय अवधि के लिए रोजगार बंद करने का अधिकार मिल जाएगा। इससे राज्य यह तय करेंगे कि गरीब कब काम करेंगे और कब भूखे रहेंगे। फंड खत्म होने या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक रोजगार से वंचित किया जा सकता है, जो कल्याण नहीं बल्कि श्रम नियंत्रण की नीति है।

विकेंद्रीकरण खत्म करने का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ग्राम सभाओं और पंचायतों के अधिकार छीनकर केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम, GIS मैपिंग, डैशबोर्ड, बायोमेट्रिक और एल्गोरिदमिक निगरानी को सौंपा जा रहा है। इससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी होगी और तकनीकी खामियों के नाम पर मजदूरों को योजना से बाहर किया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि मनरेगा की मांग आधारित प्रकृति को खत्म कर सीमित आवंटन प्रणाली लाने से रोजगार का कानूनी अधिकार एक बजट आधारित, मनमानी योजना में बदल जाएगा, जिससे गरीब और बेरोजगारों को नुकसान होगा। कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी, मजदूर विरोधी और संघीय विरोधी फैसले का सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेगी।

नेशनल हेराल्ड मामला: कांग्रेस ने अदालत के फैसले का किया स्वागत
प्रेस वार्ता में श्री आलोक शर्मा ने नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बारह वर्षों बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से चलाया गया था। अदालत द्वारा केस खारिज किया जाना भाजपा और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर करारा प्रहार है।

उन्होंने कहा कि श्रीमती सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी को बदनाम करने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का लगातार इस्तेमाल किया गया, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि मामले का कोई कानूनी आधार नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि न तो कोई मूल अपराध था और न ही मनी लॉन्ड्रिंग की कोई वैध जांच का आधार।

श्री शर्मा ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि सत्ता के दबाव में संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।

कांग्रेस ने दोहराया संघर्ष का संकल्प
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। कोई भी धमकी सच को दबा नहीं सकती। सत्य की जीत हुई है और आगे भी होगी।

इस अवसर पर हल्द्वानी विधायक श्री सुमित हृदयेश, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट, जिलाध्यक्ष राहुल चिमवाल, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्रीमती खष्टी बिष्ट, पूर्व महानगर अध्यक्ष हरीश मेहता, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हेमन्त बगड़वाल, नरेश अग्रवाल, मलय बिष्ट, गोविंद बगड़वाल, संजय किरौला, महेश कांडपाल, हेमन्त पाठक सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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